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जीतेगा जज़्बा "कोरोना" से (The Courage Will Win Over Corona)

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  जीतेगा जज़्बा "कोरोना" से  यूँ लगता है जिंदगी मुरझा सी गयी है, अरमानों की कली कुम्हला सी गयी है, सपनों की फ़ेहरिस्त तो अच्छी खासी है, पर फिर भी छाई एक अजीब उदासी है। जिस जहाँ को हम अपना समझते थे, जिधर मन चाहे इत्मिनान से विचरते थे, वहां अब न जाने क्यूँ लगी पाबंदियां हैं, पाँवों में लग गयी अनजानी बेड़ियाँ हैं। एक अनकहे डर से ये रूह काँपती है, गले मिलने से अब इंसानियत भागती है, फासले तो पहले भी इस जहाँ में कम न थे, पर गले मिलने में फिर भी पीछे हम न थे। ये 'कोरोना वायरस' का अगर प्रभाव है, हमारे अंदर भी नहीं शक्ति का अभाव है, किया है हमने कई आपदाओं का सामना, बस तुम रखो सावधानी, हिम्मत न हारना। फिर जहाँ में पहले जैसी चहल पहल होगी, न रहेगा कोई भी कोरोना वायरस का रोगी, फिर सब खुल के सभी से मुलाकात करेंगे, अपने जज़्बे से जीत का हम इतिहास रचेंगे।। - समीर उर्फ 'सहर नवाबी'

ठहराव (Thehrav)

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ठहराव (Thehrav) हर वक़्त गुज़र जाता है,  कारवां ज़िन्दगी का चलता रहेगा.. आज एक मुश्किल दौर है, पर ये दौर भी कब तक रहेगा। कुछ आदत सी पड़ गयी है हमें, खुद से बात करना मुश्किल लगे.. दुनिया की इस भेड़ चाल में हमें बस चलते जाना ही अच्छा लगे। कभी कभी ठहराव भी ज़रुरी है, ज़रा इत्मिनान से सोच कर देखो.. कहाँ वक़्त मिलता है यूँ हमेशा, ज़रा अपनी रूह से पूछ कर देखो। ये रास्ते जो आज सूने पड़े है, इनकी आवाज़ सुनाई दे रही है.. कुछ सुकून तो मिला इन्हें भी, इनकी दास्तान तो अनकही है। कल फिर ज़िन्दगी रफ़्तार लेगी, कुदरत का ये दस्तूर चलता रहेगा.. फिर न मिलेगी पल-भर फुरसत हमें, शिकायतों का दौर फिर चलता रहेगा।। - समीर उर्फ 'सहर नवाबी'

कोरोना से संघर्ष (Struggle with Corona)

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कोरोना से संघर्ष   आज इंसान कर रहा कठिन संघर्ष है, विशेषज्ञों से ले रहा तमाम परामर्श है.. ये कैसी मुश्किल घड़ी आन पड़ी है, बंद कमरों में ज़िन्दगी गुज़र रही है। चेहरे पे मास्क है और दिल में डर, नौकरी की चिंता, मंदी का असर, किसी को है अपनों से मिलने की आस किसी को चाहिये खुलेपन का एहसास। जब प्रकृति के कई नियम टूट रहे थे, तब भी हम  सुनहरे सपने बुन रहे थे.. बेचैनी अब हर दिन क्यों बढ़ रही है, ईश्वर पर आस्था क्या अब नहीं है? अब भी हमने अगर गलती न मानी, तो बह जायेगा सिर के ऊपर से पानी.. करो पालन सभी सरकारी आदेशों का, बचा लो देश को, मत करो तुम नादानी। जब उम्मीद दम तोड़ती प्रतीत होती है, तभी मायूसी ज़िन्दगी में शरीक होती है.. ज़िन्दगी मगर संघर्ष का प्रतीक होती है, अंधेरे पे हमेशा उजाले की जीत होती है ।। - समीर उर्फ 'सहर नवाबी'

मेरी माँ (माँ पर कविता) - Meri Maa (Maa Par Kavita)

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मेरी माँ लबों पे उसके हमेशा सिर्फ दुआ होती है, माँ ही तो है जो हर दर्द की दवा होती है, सच है कि जब भी माँ हमारे पास होती है, ज़िन्दगी की हर इक शय खास होती है। उसे हमेशा अपनी औलाद की फिक्र है, उसकी सभी बातों में उनका ही जिक्र है, बस उसके बच्चे खुश और सलामत रहें, उनके चेहरे पे हंसी देख उसे राहत मिले। जो चेहरे से ही दिल का हाल जान ले, जो हमारी हर दुखती रग पहचान ले, उसे हमारी हर इच्छा का आभास है, सच कहूँ तो माँ जन्नत का एहसास है। तुझे किस मिट्टी से बनाया कुदरत ने माँ, तेरी शख्सियत के आगे फीका है ये जहां, मैं महफूज़ हूँ तेरे प्यार के सुरक्षा कवच से, मैं हूँ खुशनसीब तेरी गोद मैँ आया जबसे।। - समीर उर्फ 'सहर नवाबी'